झीलों के वतन में

झीलें देखकर भला कौन खुश नहीं होता? हर किसी की ख्वाहिश होती है कि वह झीलों के किनारे घूमे, तफरीह करे और उसमे कश्ती चलाये। आइये! आज आपको झीलों के वतन लिए चलते हैं।

झीलों का लुत्फ़ उठाने के लिए राजस्थान एक बेहतरीन जगह है, उदयपुर तो झीलों का शहर कहा जाता है। अजमेर और माउन्ट आबू की झीलें मशहूर हैं। नमक की झीलें भी राजस्थान में पायी जाती हैं। यहाँ पर हम आपको कुछ झीलों के बारे में बता रहे हैं। उदयपुर में “पिछोला झील” और “फतह सागर” झील हैं। उदयपुर से 13 किलो मीटर की दूरी पर “उदय सागर” झील है। उदय सागर झील को “महाराणा प्रताप” ने बनवाया था। ये झील 1559 से 1565 के दौरान बानी। उस झील का रकबा 5 मुव्बा किलो मीटर है।

“जय समंद झील” एशिया की सबसे बड़ी इंसान द्वारा बनायीं गयी झील है। ये लगभग 14 किलोमीटर लम्बी और 906 किलो मीटर चौड़ी है। इस पर बने बाँध को महाराजा जय सिंह ने बनवाया था। ये बहुत लुभावनी झील है। यहाँ संगेमरमर से बना बाँध 183 मीटर लम्बा और 24 मीटर चौड़ा है।

संभर में राजस्थान की सबसे बड़ी नमक झील है। उसका रकबा 630 मुव्बा किलो मीटर है। जोधपुर जिला में नमक की दूसरी बड़ी झील है। जोधपुर में “बाल समंद”, अजमेर में “आना सागर” और पाल पर बनी 12 दरिया, माउन्ट आबू में “निकथी झील”, जयपुर के पास रामगढ, आमेर में “माऊंण”, कोटा में “छतरुलास ताल”, बुंदी में “एन्यत सागर” और “फुसागर” और उनके किनारे बने महल सभी को लुभाते हैं।

अगर आपको मौका मिले तो उन जगहों पर ज़रूर तफरीह के लिए जाइएगा।

खुश्बू अंसारी

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