कौन थे बाबा साहेब अम्बेडकर?

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इस समय बाबा साहेब अंबेडकर को लेकर पूरे भारत वर्ष में राजनीति गरमाई हुए है, इसकी वजह से जगह जगह इनकी मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है। समाज में आज भी लोग अम्बेडकर को अछूत की दृष्टि से देखते हैं, जबकि इन्होंने सदैव समाज के दबे हुए लोगो के लिए आवाज़ उठायी है। 14 अप्रैल को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रमोदी ने बाबा साहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके कार्यों को बताया साथ ही उनकी मूर्तियों के साथ हुई घटनाओ को अंजाम देने वाले लोगो के ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाही करने के आदेश दिए। इन्ही सभी घटनाओं को लेकर दलित वर्ग ने 2 अप्रैल को भारत बंद की घोषणा की, भारत बंद के दौरान 19 लोगों की मौत हुई।

कौन थे अम्बेडकर ?
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर एक व्यक्तित्व हैं जो अपने कार्य के लिए भारत में ही नही बल्कि पूरी दुनिया मे जाने जाते है। 14 अप्रैल 1891 में मध्य प्रदेश के मऊ नाम के एक गांव में पैदा हुए, इनके पिता रामजी और माता मलोजी सकपाल थीं। ये महार जाति से थे जिसे हिन्दू धर्म में अछूत माना जाता था। साथ ही इनके घर की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नही थी। सभी भाई बहनों में उनको ही उच्च शिक्षा मिल पाई थी।

अम्बेडकर का जीवन संघर्ष:
वेदों के अनुसार चार वर्णाश्रम हैं, चौथे में महार जाति के लोग आते हैं। जो अछूत की श्रेणी में आते हैं, इन्हें अछूत होने का सामना करना पड़ा। उस समय अछूत की स्थिति इतनी गम्भीर थी कि उनको स्कूल में पड़ने का अधिकार नही था और गिलास में पानी पीने तथा चप्पल जूता पहनने जैसे भी अधिकार प्राप्त नही थे। इन सभी कुरीतियो को लेकर अम्बेडकर ने आवाज़ उठाई, साथ ही हिन्दू धर्म में कुरीतियों को खत्म करने का प्रयास किया। ये ख़ुद को इंसान समझते थे यही बात समाज को बताते बताते इन्होंने 14 अक्टूबर, 1956 में बौद्ध धर्म अपना लिया।

सविंधान के निर्माता:
15 अगस्त 1947 में देश को आज़ादी मिली। देश के संविधान के निर्माण के लिए इन्हें प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। दो वर्ष गयारह माह अठारह दिन में इन्होंने संविधान को पूरा किया साथ ही 26 जनवरी 1952 को लागू भी कर दिया गया। इन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था और इनके पास 32 डिग्रियां थी इसी वजह से ये भारत के पहले क़ानून मंत्री बनाये गए।

अम्बेडकर ने समाज मे व्याप्त बुराइयों के लिए सबसे ज़्यादा अशिक्षा को जिम्मेदार माना है। इन्होंने अछूतों के अधिकार ही नही बल्कि समाज को पुनर्निर्माण पर ज़ोर दिया साथ ही मज़दूर वर्ग के कल्याण का प्रयास किया। जहाँ मज़दूर को 14 से 16 घण्टा काम करना पड़ता था, अम्बेडकर ने 8 घण्टे का नियम बना दिया।

साकिब अली
अमुवि

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