अशिफ़ा केस की हकीक़त!

10 जनवरी को जम्मू कश्मीर के लसाना गांव से अशिफ़ा नाम की बच्ची लापता हो गई थी। लापता होने के 7 दिन बाद बच्ची का शव जंगल से बरामद किया गया। सरकार ने ये मामला 23 जनवरी को क्राइम ब्रांच को सौप दिया था, जिसके बाद इस केस में एसपीओ को गिरफ्तार किया गया था।

अब तक इस केस में करीब 8 लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। इनमें 2 स्पेशल पुलिस ऑफिसर, एक हेड कॉन्सटेबल, एक सब इंस्पेक्टर, एक कठुआ निवासी और एक नाबालिग शामिल है।

चार्जशीट के मुताबिक बच्ची को जनवरी में एक हफ्ते तक कठुआ जिला स्थित एक गांव के एक मंदिर में बंधक बना कर रखा गया था और उसके साथ छह लोगों ने बलात्कार किया था।

चार्जशीट में बताया गया कि बच्ची को नशीली दवाई देकर लगातार उसका रेप किया गया। और साथ ही एक आरोपी ने अपने चचेरे भाई को ख़ास तौर पर मेरठ से फ़ोन करके बुलाया, ताकि वो भी बच्ची का रेप कर सके। इतना ही नही बच्ची की हत्या करने से पहले एक बार फिर उसका रेप किया गया।

दिल को झकझोर देने वाली इस घटना को लेकर पूरे देश में गुस्सा है। अशिफ़ा के परिवार में दुख का माहौल है। उन्हें बस उम्मीद है तो अब सिर्फ न्याय की।

अशिफ़ा को लेकर पूरे भारत में जगह जगह बड़ी तादाद में लोगो ने दोषियों सज़ा दिलाने के लिए मार्च निकाला और साथ ही इसी बीच लोगो मे सरकार को लेकर गुस्सा नज़र आया है। इसका असर जनता आने वाले चुनाव में सरकार को गिराकर दिखा सकती है। लेकिन सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधेे हुए है।

वहीं दूसरी तरफ अशिफ़ा की मां ने रोते हुए कहा कि मेरी मासूम बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था, उसकी क्या गलती थी जो उसे मार दिया। पहले लगा कि मानो अशिफ़ा को किसी जानवर ने खाया है। अशिफ़ा के पिता ने कहा है कि हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा है,दोषियों को सजा दी जाए।लेकिन मुझे डर है कि मेरे परिवार की हत्या हो सकती है।अब हमें दूसरी बेटी को जंगल भेजने में डर लगता है।

 

साकिब अली

अमुवि

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