मानस की जात सबै एकै पहचानबौ।

कोऊ भयौ मुड़िया संन्यासी कोऊ जोगी भयौ
कोऊ ब्रह्मचारी कोऊ जति अनुमानबौ ।
हिन्दू -तुरक कोऊ राफजी इमाम शाफी
मानस की जात सबै एकै पहचानबौ ।
करता करीम सोई राजक रहीम ओई
दूसरौ न भेद कोई भूल भ्रम मानबौ ।
एक ही की सेव सब ही कौ गुरुदेव एक
एक ही सरूप सबै एकै जोत जानबौ !

गुरु गोविन्दसिंह

सादर: राम मोहन राय जी, पानीपत
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