लखनऊ पे होगा महिला राज।

यूपी निकाय चुनावों में महिलाओं को आरक्षण दिये जाने के बाद से अब महिलाएं न सिर्फ प्रत्याशी बन रही हैं, बल्कि जीत का परचम भी लहरा रही हैं. दरअसल, नवाबों का शहर लखनऊ 100 साल में पहली बार किसी महिला को अपना मेयर चुनने जा रहा है। आपको बता दें कि पिछले 100 साल में लखनऊ की मेयर कोई महिला नहीं बनी है.

इस बार लखनऊ मेयर की सीट महिला के लिए आरक्षित है. सत्ता पर क़ाबिज़ भाजपा सहित विभिन्न दलों ने महिला प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, मगर इस बार चाहे कोई भी दल जीते, इतिहास बनना तो तय है। क्यूंकि की सौ साल में पहली बार लखनऊ में कोई महिला मेयर बनेगी।

लखनऊ में मेयर भले ही कोई महिला नहीं रही हो लेकिन यहां से लोकसभा के लिए तीन बार महिलाएं जीतकर पहुंची हैं। लखनऊ से शीला कौल 1971, 1980 और 1984 में चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची थीं। उत्तर प्रदेश म्यूनिसिपैलिटी कानून 1916 में अस्तित्व में आया, बैरिस्टर सैयद नबीउल्लाह पहले भारतीय थे, जो स्थानीय निकाय के मुखिया बने। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1948 में स्थानीय निकाय का चुनावी स्वरूप बदला और प्रशासक की अवधारणा शुरू की।

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