नरेन्द्र मोदी जी का एक फैसला बदल देगा भारत की तस्वीर?

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चाहे वह गंगा नदी के दियों से चमकते घाट हों या धूप से झुलसते हुए पहाड़।
भारत में हर एक चीज़ की एक अपनी पहचान है। अमृतसर शहर में शान से खड़ा जगमगाता स्वर्ण मंदिर, उत्तराखंड के पहाड़ों की ऊंचाइयों में खोए हुए चार धाम, दिल्ली की तंग गलियों से आज़ाद जामा मस्जिद की सुरीली अज़ान या गोवा की हवाओं में तैरती खुशबू सा से कैथेड्रल चर्च।

हिंदुस्तान, एक राष्ट्र होते हुए भी यहाँ सभी धर्मों की पहचान बिलकुल अलग है। इस देश को यही चीज़ इतनी खूबसूरत बनाती है भारत के बारे में ऐसी बातें तो हर कोई करता है। लेकिन आज का मुद्दा कुछ अलग है, एक ऐसा मुद्दा, एक ऐसा सवाल जो हर भारतीय के ज़हन में आता है!
सवाल है कि, “आज तक भारत का प्रधान मंत्री कोई मुस्लिम क्यों नहीं बन पाया है?”
आज़ादी के 67 साल बाद भी, इस सेक्युलर भारत में एक भी मुस्लिम प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं किया गया।

पहली वजह यह हो सकती है कि आज की तारीख़ में उतने प्रभावशाली मुस्लिम नेता या लीडर नहीं बचे हैं और जो बचे हैं वे बिलकुल अतिवादी ख़यालों के हैं।

दूसरी वजह यह है कि भारत देश की जनता, जहां 85% लोग हिंदू हैं, क्या एक मुस्लिम प्रधान मंत्री को चुनेगी? क्योंकि आप सभी हिंदू-मुस्लिम रिश्तों के इतिहास को जानते हो।

चलिए अगर एक मुस्लिम, प्रधान मंत्री बन भी गया तो क्या वह भारत जैसे देश को सम्हाल पाएगा? जहां हर पल कुछ न कुछ होता ही रहता है।

ऐसी बात नहीं है कि प्रभावशाली सशक्त मुस्लिम नेताओं की भारत में कमी थी, ऐसे कई नेता थे जो मुस्लिम थे लेकिन साथ-साथ प्रभावशाली भी थे। जैसे कि मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद।

क्या भारत अगले 10 या 15 सालों में एक मुस्लिम प्रधानमंत्री के लिए तैयार हो जाएगा या फिर कोई आपसी झगडे इस राजनैतिक सफ़र का रुख मोड़ देंगे?

वैसे हमारे प्रधानमन्त्री सबका साथ सबका विकास की बात करते हैं ऐसे में अगर वो मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाते हैं तो शायद उनकी छवि एक महान नेता की बन सकती है।

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